सरकार ने कितने प्रतिबंध लगाएं हैं चाइना के खिलाफ...(Boycott China is good for India or Not !)
किसी भी देश की जीडीपी इसी पर निर्भर करती है कौन सा देश कितना व्यापार (ट्रेड) करता है जितना ज्यादा ट्रेड उतना उतनी ज्यादा ग्रोथ, पर जब कोई देश दूसरे देश की सीमाओं में घुस आए तो वहां के नागरिक विपक्षी देश के सामन को लेने से मना करके,सरकार ये काम सीधा नहीं कर सकती पर नागरिक चाहें तो किसी भी चीज का बहिष्कार कर सकते हैं वा स्वदेशी उत्पाद वा अन्य चीज विकसित कर सकते हैं आत्मनिर्भर बना सकते हैं देश को...
इंडियंस के चाइनीज ऐप्स और चाइनीज सामान को ना कहकर,कितना नुकसान है पहुंचा सकते हैं यह जानने के लिए देखना होगा चाइना कुल कितने देशों को अपना बनाया समान बेचता हैं।चाइना कुल '117 देशों 'को सामान देता है, वहीं '81देशों ' से आयात करता है।
कोई देश इसके सस्ते बने सामान को लेने से पीछे नहीं हट रहा।
वहीं इंडिया ने पिछले वर्ष 75million डॉलर का चीन से आयात किया जिसको देखा जाए तो चीन के कुल निर्यात का केवल 3.3% ही है।
सवाल ये आता है कि इंडिया को बॉयकॉट करना चाहिए या नहीं पर इस समय देश हित में चाइना को बॉयकॉट करना उचित है पर "मैगी"(Nestle)की तरह इसको सरकारें फिर से लागू ना कर दें आज बैन कर दें पर फिर से कुछ समय बाद पाबंदी हटा दें। सरकार निजी हितों को ध्यान ना रखते हुए "देश हित" में फैसला करें, भारतीय नागरिकों वा सरकारी विभागों की गोपनीयता भंग न हो इस तरह के मुद्दों को ध्यान में रखकर काम करे , बॉयकॉट चीन से दिक्कतें तो आएंगी शुरूआत में ,पर एक समय के बाद देश में कई बेहतर उद्योग,तकनीक विकसित होने के अवसर उत्पन्न होंगे।
विश्व के अन्य देश भारतीयों की तरह ही चीन के खिलाफ बॉयकॉट करना शुरू करेंगे ही। ट्रंप का (Trade war)भी इसी बात का प्रमाण है।
इंडिया के परिवहन मंत्री नितिन गड़कारी जी ने कहा है कि भविष्य में हम सभी आने वाले रोड के प्रोजेक्ट किसी भी कीमत पर चाइनीज कंपनियों को नहीं देंगें, वहीं ऊर्जा मंत्री जी ने सभी तरह के बिजली उपकरणों को आगे से चाइना से आयात नकारने की बात कही है।
देश की Cement जगत की (JSW Group) ने ऐलान किया कि अगले २४ महीनों में कोशिश होगी की कैसे भी चीन से आयात को 475 million डॉलर से 0 डॉलर पर लाया जाए।
वहीं एक ओर मद्रास हाईकोर्ट ने पीआईएल डाली गई है राज्य सरकार के खिलाफ, बाजार में चाइना के घटिया थर्मामीटर को लेकर जो कि बाजार में सस्ते मिल रहें हैं वा रीडिंग सही नहीं से पा रहे आने वाले समय में इसकी उपयोगिता कितनी है सभी जानते हैं।
चीन और भारत एशिया की दो सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति (India China Business) है, लेकिन आपसी व्यापार के मामले में चीन का पलड़ा भारी है. लेकिन हाल में भारत को एक्सपोर्ट (India Export to China) के मोर्चे पर बड़ी सफलता मिली है. भारत में चीन से होने वाला आयात कम हो गया है क्योंकि, भारत का चीन को एक्सपोर्ट 31 फीसदी बढ़ा है. साथ ही,एमवीआईआरडीसी वर्ल्ड ट्रेड सेंटर (MVIRDC World Trade Center) मुंबई की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के पास चीन को करीब 82 अरब डॉलर मूल्य के 20 उत्पादों का निर्यात करने की क्षमता है. इन उत्पादों में (ferro allot) शामिल हैं वहीं दूसरी ओर भारत, चीन को गैर-बासमती चावल जैसे कृषि सामानों का निर्यात करने में कामयाब रहा है. इसके अलावा कृषि उत्पादों, पशु चारा, तिलहन, दूध और दूध से बने प्रोडेक्ट और औषधि की डिमांड बढ़ी है।
सबसे बड़ी बात है चाइना का सामन कोई भी हो घटिया उत्पाद के मामले में विश्व नंबर एक पर है, डुप्लीकेट सामान बनाना, सस्ता उत्पाद तैयार करना वा घटिया उत्पाद बनाना इसकी प्राथमिकता रहती है।
चाइना को डर सबसे बड़ा यही है कि अन्य देश भी ऐसा बॉयकॉट ना करने लग जाएं तभी चाइनीज फॉरेन मिनिस्ट्री स्पोक पर्सन जाहो लिजियान ने शुक्रवार को प्रधान मंत्री नरेंद्र को तीखी प्रतिक्रिया देते हुए, "चीन के संबंध में एक रणनीतिक व्याख्या" बनाने के खिलाफ भारत को चेतावनी दी।
इससे साफ चीन वैश्विक मायनों में अलग थलग नहीं होना चाहता दिखाना चाहता है कि वो अपनी सीमाओं में ही है और कुछ ग़लत नहीं कर रहा है बॉर्डर पर इसके विपरित उसने अपने लगभग सभी सीमावर्ती देशों से कब्जा अपने रौब से किया है
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